भारत का सौर ऊर्जा अभियान :रीवा सौर प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश (ये लेख विभिन समाचार पत्रों में छपे सम्पादकीय लेखों पर आधारित है )
सौर ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत है। सौर ऊर्जा के लिए मुख्य रूप से सूर्या की उपलब्धता होना अनिवार्य है और भारत के लिए मजबूत पक्ष ये है कि भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है। उष्ण- कटिबंधीय देश होने के कारण हमारे यहाँ वर्ष भर सौर विकिरण प्राप्त होती है, जिसमें सूर्य प्रकाश के लगभग 3000 घंटे शामिल हैं।
भारतीय भू-भाग पर पाँच हज़ार लाख किलोवाट घंटा प्रति वर्गमीटर के बराबर सौर ऊर्जा आती है।
भारत सरकार ने 2022 के अंत तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें पवन ऊर्जा से 60 गीगावाट, सौर ऊर्जा से 100 गीगावाट, बायोमास ऊर्जा से 10 गीगावाट और लघु जलविद्युत परियोजनाओं से 5 गीगावॉट शामिल है।
सौर ऊर्जा उत्पादन में सर्वाधिक योगदान रूफटॉप सौर उर्जा (40 प्रतिशत) और सोलर पार्क (40 प्रतिशत) का है।
यह देश में बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता का 16 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर स्थापित क्षमता का 60 प्रतिशत करना है।
क्यूंकि आवादी के मामले में भारत 2040 तक चीन से आगे निकल जाएगा तो हमें इस बात को धयान में रखते और प्रकृति के अत्यधिक दोहन से होने वाले नुक्सान को समझते हुए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हमारी भविष्य कि ऊर्जा मांग नवीकरणीय स्त्रोतों से पूरी कि जाये।
इस दिशा में बढ़ने का एक मजबूत कदम है अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के रीवा सौर प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया गया जिसकी क्षमता 750 MW है और ये 1500 हेक्टेयर में फैला है। इस सौर पार्क में 250 MW कि तीन इकाईयां शामिल हैं। यह सौर परियोजना ‘ग्रिड समता अवरोध’ (Grid Parity Barrier) को तोड़ने वाली देश की पहली सौर परियोजना हैं।
इस सौर पार्क के विकास के लिये भारत सरकार की ओर से ‘रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड’ को 138 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद प्रदान की गई थी। इस सौर पार्क को ‘रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड’ ने विकसित किया है जो ‘मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड’ और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई ‘सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (Solar Energy Corporation of India- SECI) की संयुक्त उद्यम कंपनी है।
सौर ऊर्जा की राह में चुनौतियाँ
सौर ऊर्जा की रह में मुख्य चुनौती है पर्यावरण की सुरक्षा सौर ऊर्जा वास्तव में पूर्ण रूप से पर्यावरण की हितैषी नहीं है। सौर ऊर्जा निर्माण में लगे उपकरणों के निर्माण के कारखानों में जो प्रौद्योगिकी प्रयोग में लाई जा रही है वह वास्तव पर्यावरण के लिए खतरा है। इसके बाद जब इन उपकरणों का जीवन काल पूरा हो जाएगा तो ये इ-वेस्ट की श्रेणी में आ जाएंगे जो की वर्तमान में एक बड़ी चुनौती है और हमारे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी खतरा है।
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